इस वर्ष का चौथा उपछाया चंद्रग्रहण 30 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा सोमवार को होगा। सनातन धर्म, ज्योतिष शास्त्र एवं हमारे धर्मशास्त्रकारों ने इस तरह के उपछाया में चंद्र बिम्ब पर मालिन्य मात्र छाया आने के कारण इसे ग्रहण कोटि में नहीं रखा। इसके लिए ग्रहण संबंधित बातों जैसे गर्भवती महिलाओं को, सूतक, स्नान, दान, जप, तप, माहात्म्य का कोई विचार नहीं होगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे एवं इसका आपकी राशियों पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उपछाया चंद्रग्रहण का समय:

यह उपछाया चंद्रग्रहण भारतीय समय के अनुसार 30 नवंबर सोमवार दोपहर 01.02 बजे से शुरू होगा। इसका मध्य दोपहर 3.13 बजे पर होगा। इसका मोक्ष इसी दिन शाम 05.23 बजे होगा। ग्रहण के समय और सूतक काल को लेकर लोगों में काफी असमंजस बना हुआ है।
क्या होता है उपछाया चंद्रग्रहण:

इस उपछाया चंद्रग्रहण के विषय में महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया कि उपछाया ग्रहण वास्तव में चंद्रग्रहण नहीं होता।कई बार पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है।चंद्रमा उपछाया में प्रवेश करके उपछाया शंकु से ही बाहर निकल जाता है और भूभा में प्रवेश नहीं करता है। इसलिए उपछाया के समय चंद्रमा का बिंब केवल कुछ समय के लिए धुंधला पड़ता है। इस धुंधलेपन को सामान्य रूप से देखा नहीं जा सकता है। इसलिए चंद्र मालिन्य मात्र होने की वजह से ही इसे उपछाया चंद्रग्रहण कहते हैं ना कि चंद्रग्रहण।

कहां-कहां दिखेगा ग्रहण:

भारत में यह उपच्छाया चंद्रग्रहण कोलकाता, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड सहित अन्य उत्तर पूर्वी एवं मध्य पूर्वी भारत में दिखाई देगा। भारत के अलावा यह चंद्रग्रहण पाकिस्तान, ईरान, ईराक, अफगानिस्तान, इंग्लैंड, आयरलैंड, नार्वे, अमेरिका, उतरी स्वीडन, उत्तरी फिनलैंड सहित प्रशांत महासागर क्षेत्र में दिखेगा। कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर सोमवार को है। इस दिन तप, दान, पुण्य, व्रत आदि कर सकते हैं।

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