दिल्ली में लाॅकडाउन होने से खाद्य वस्तुओं के दाम पिछले पखवाड़ा में ही बढ़ना शुरू हो गए थे और अब जम्मू में लॉकडाउन से फल-सब्जियों के दाम भी आसमान पर चढ़ गए हैं। हालत यह हो गई है कि कोरोना महामारी से जूझ रहे मरीजों को जरूरी फल तक नहीं मिल पा रहे। हैरानी यह है कि न तो जिला प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा है और न ही खाद्य आर्पूति एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग की ओर से लोगों को वाजिब दाम पर फल-सब्जियां उपलब्ध करवाने की दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा है। इन सबके बीच लोग लगभग दोगगुने दाम देकर फल-सब्जियां खरीदने पर मजबूर हो रहे हैं।
जम्मू में पिछले एक सप्ताह में फलों के दाम सबसे अधिक बढ़े हैं। इसके बावजूद मंडी में फलों की उपलब्धता न के बराबर है। मंडी विक्रेताओं की माने तो इस बार लॉकडाउन में फल-सब्जी मंडी भी केवल चार घंटे खोलने की अनुमति दी गई है। ऐसे में खुदरा मंडी के विक्रेता कब थोक मंडी जाकर खरीदारी करेंगे और कब अपनी मंडी में आकर बिक्री करेंगे। इस कारण काफी लोग दुकान बंद करके बैठ गए है। इस कारण आदम कम हुई और शायद इसी कारण फलों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं।

संतरा-कीवी हुई गायब

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इस समय डाक्टर संतरें व कीवी के सेवन की सलाह दे रहे हैं जिससे इनकी मांग कई गुणा बढ़ गई है। शहर की मंडियों में इस समय न तो संतरा मिल रहा है और न ही कीवी। एक सप्ताह पहले बाजार में कीवी 20 रुपये प्रति पीस तक उपलब्ध थी लेकिन अब जहां-कहीं भी अगर कीवी मिल रही है तो उसका दाम 50 रुपये प्रति पीस तक पहुुंच चुका है। कोरोना महामारी के बीच कच्चे नारियल के पानी की मांग कई गुणा बढ़ी है। इस कारण इसके दाम भी बीस रुपये प्रति नारियल तक बढ़ा दिए गए है।

एक सप्ताह पूर्व कच्चा नारियल 50 रुपये में बिक रहा था लेकिन आज मंडी में इसका दाम 60 रुपये जबकि अन्य रेहड़ी-फड़ी पर यह नारियल 70 रुपये तक बिक रहा है। विटामिन-सी के लिए सबसे सस्ता विकल्प नींबू था लेकिन इसके दाम भी आसमान पर चढ़ गए है। सप्ताह पूर्व शहर की मंडी में नींबू के दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलो थे लेकिन आज यहीं नींबू 150 से 170 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है। अनार की बात करें तो एक सप्ताह में इसके दाम 50 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। पिछले सप्ताह 100 रुपये प्रति किलो में मिलने वाला अनार आज 150 रुपये प्रति किलो में मिल रहा है।

बाहर से माल कम आ रहा है

बाहर से माल कम आ रहा है। इस कारण दामों में कुछ तेजी है। अब हमें केवल चार घंटे काम करने की इजाजत है। ऐसे में काम भी सहीं ढंग से नहीं हो पा रहा। जो खुदरा मंडी के लोग आते हैं, जल्दी में रहते है। कई बार चार घंटों में मॉल बिक नहीं पाता और अगले बेचने के काबिल नहीं रहता। इसलिए खुदरा व्यापारी तो अपना सारा नुकसान बिक्री से ही पूरा करेगा। शायद इसलिए बाजार में दाम कुछ अधिक होंगे। थोक मंडी में तो दामों पर इतना असर नहीं है।

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