जम्मू-कश्मीर में निजी क्षेत्र के 5.70 लाख पीएफ खाता धारक कर्मचारियों के लिए बुरी खबर है। प्रदेश में केंद्रीय कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) और विविध प्रावधान अधिनियम 1952 लागू होने से पहले का उनका सारा रुपया पैसा फ्रीज हो गया है। कर्मचारी के खाते में लाखों होने के बावजूद वे आंशिक निकासी नहीं कर सकता।
केंद्रीय कानून में जम्मू-कश्मीर के कर्मियों का नवंबर 2019 में पंजीकरण हुआ है। इससे पूर्व की उनकी सभी सेवाओं को मान्यता नहीं देने से ऐसी स्थिति पैदा हुई है। ऐसे में प्रदेश के कर्मियों को केंद्रीय कानून के लागू होने से पूर्व की सेवाओं के आधार पर पेंशन लाभ मिलने की संभावना कम हो गई है। प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की सेवाओं को नवंबर 2019 से मान्यता मिली है। ऐसे में प्रदेश के ये कर्मचारी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
जम्मू कश्मीर के निजी क्षेत्र के इन कर्मचारियों का जब पैसा केंद्र के पास ट्रांफसर किया तो प्रदेश सरकार ने इन कर्मचारियों की नौकरी की अवधि को मान्यता देने की मांग केंद्र के समक्ष रखी थी। इसे लेकर दो वर्षों में कई बैठकें भी हुई। कुछ हद तक सहमति बनी लेकिन अब अधिकांश कर्मचारियों का पैसा और रिकार्ड केंद्र के पास ट्रांसफर हो चुका है, यह मांगें पूरी नहीं हुई। प्रदेश के कर्मचारियों का सारा रिकार्ड आनलाइन कर दिया है। अगर कोई आंशिक निकासी करना चाहे तो उसे आनलाइन ही आवेदन करना है लेकिन अलग-अलग निकासी के लिए अलग-अलग नौकरी की अवधि निर्धारित की है। मसलन अगर किसी को बेटी की शादी के लिए आंशिक निकासी करनी है तो उसके लिए पांच साल की नौकरी होना अनिवार्य है। ऐसे में जो कर्मी पिछले दस वर्षों से पीएफ खाते में पैसा जमा करा रहे हैं, वो भी निकासी नहीं करवा पा रहे क्योंकि केंद्र के रिकार्ड में उनकी सेवाएं नवंबर 2019 से आरंभ हुई।
पैसा ले लिया, सेवाओं को मान्यता नहीं

प्रदेश के निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का पैसा तो केंद्र सरकार ने ले लिया। इन कर्मचारियों की पुरानी सेवाओं को मान्यता नहीं दी। केंद्रीय कानून के तहत नवंबर 2019 से प्रदेश के सभी 5.70 लाख खाता धारकों का नए सिरे से पंजीकरण किया। सभी 5.70 लाख कर्मचारियों की नौकरी को इसी समय से मान्यता मिली है। ऐसे में पेंशन का हकदार बनने के लिए नवंबर 2019 के बाद दस साल की नौकरी अनिवार्य होगी। इसका सबसे अधिक नुकसान उन कर्मचारियों को होगा जो 2019 के बाद दस साल पूरे करने से पहले ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

नौकरी पूरी होने पर ही मिल पाएगा पैसा

अगर केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों को 2019 से पहले की सेवाओं को मान्यता नहीं दी तो आने वाले दो-चार वर्षों तक कर्मचारी अपने खाते से आङ्क्षशक निकासी नहीं कर पाएंगे। वे 2019 के बाद की सेवाओं के आधार पर निकासी के लिए आवेदन कर पाएंगे जोकि कम रकम होगी। ऐसे में कर्मचारी के नौकरी छोडऩे या सेवानिवृत्त होने की सूरत में ही उसे अपने खाते में जमा पूरा पैसा मिल पाएगा।

सामाजिक सुरक्षा का मिला लाभ

केंद्रीय कानून के तहत कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का तत्काल प्रभाव से लाभ मिल गया है। इसके तहत किसी भी कर्मचारी की मौत पर आश्रितों को अब 70 हजार रुपये की सहायता के बजाए केंद्रीय कानून के तहत छह लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। श्रीनगर में पिछले साल हुई सेंट्रल बोर्ड आफ ट्रस्टी ईपीएफओ की बैठक में इसे स्वीकृति दी गई थी। प्रदेश के कानून के तहत पहले अगर किसी कर्मचारी की मौत हो जाती थी तो आश्रितों को 70 हजार रुपये की सहायता मिलती थी, लेकिन अब केंद्रीय कानून के तहत छह लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा।
हमने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से कई दौर की बातचीत की है। जम्मू कश्मीर पीएफ एक्ट के तहत 4 फीसद प्रबंधन शुल्क कटता था, जो केंद्रीय कानून में 0.5 फीसद है। ऐसे में हमारे पास 3.5 फीसद अतिरिक्त राशि का करोड़ों बन रहा है। हमने मांग रखी थी कि इस अतिरिक्त राशि को कर्मचारियों के पेंशन फंड में डालकर उन सभी को पेंशन लाभ के दायरे में लाया जाए, जिनका 10 साल का कार्यकाल पूरा होता है। इससे कर्मचारियों की पुरानी सेवाओं को मान्यता मिल जाती। आज ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। हम तो यहां तक कह रहे है कि कर्मचारियों की 50 फीसद सेवाओं को मान्या दे दो, लेकिन अभी तक केंद्र ने इसे लेकर कोई फैसला नहीं किया। हम जानते है कि इससे लोगों का नुकसान है। इसलिए हम लगातार कोशिश कर रहे हैं। -राशिद वार, आयुक्त श्रम विभाग

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