कांग्रेस और निर्दलीय कारपोरेटरों ने नगर निगम के मेयर चंद्रमोहन गुप्ता पर भ्रष्टाचार छुपाने के लिए जनरल हाउस की बैठक नहीं बुलाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब संसद चल सकती है, बड़ी संख्या में लोगों के साथ ध्वजारोहण हो सकता है, राजनीतिक सभाएं हो सकती हैं तो फिर जनरल हाउस की बैठक बुलाने में मेयर की तरफ से टालमटोल करना सवाल खड़े करता है। कारपोरेटरों ने कहा कि मेयर अन्य विभागों पर डोर कसना तो दूर, नगर निगम पर भी अपनी पकड़ नहीं बना पाए हैं। उन्होंने जल्द जनरल हाउस की बैठक नहीं होने पर राजभवन के बाहर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। नगर निगम में कांग्रेसी व निर्दलीय कारपोरेटरों की तरफ से वीरवार को टाउन हाल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के चीफ व्हिप द्वारका चौधरी ने कहा कि कारपोरेटरों को चुने हुए तीन साल का समय होने को है, लेकिन इस दौरान सिर्फ आठ जनरल हाउस की बैठकें ही हुई हैं, जबकि हर महीने कम से कम एक बैठक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना की आड़ में मेयर जनरल हाउस की बैठक टालते रहे हैं, जो सही नहीं है। लोगों ने कारपोरेटरों को चुनाव इसलिए किया ताकि वे विकास कार्य करवाएं, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया जा रहा है। वहीं, कारपोरेटर गौरव चोपड़ा का कहना था कि मेयर अपनी नाकामी छुपाने के लिए जनरल हाउस की बैठक नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेयर तमाम सरकारी विभागों के अध्यक्ष हैं। उनकी नाकामी की वजह से 14वें फाइनेंस कमीशन का 218 करोड़ रुपया वापस जा चुका है। सिर्फ 64 करोड़ रुपये के ही काम हो सके। हमारे पास पांच इंजीनियरिग डिवीजन हैं, फिर भी काम नहीं हो रहे हैं। गौरव ने कहा कि चंद्रमोहन गुप्ता के मेयर बनने के बाद दो बार नगर निगम में सीबीआइ का छापा पड़ा चुका है। स्ट्रीट लाइटों को लगाने और स्मार्ट सिटी में धांधलियां हुई हैं। इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन कारपोरेटर इन मुद्दों को कहां उठाएं। इस मौके पर सुच्चा सिंह, अमित गुप्ता, सौबत अली, प्रीतम सिंह, प्रो. युद्धवीर सिंह आदि कारपोरेटर मौजूद थे। ‘सिर्फ स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े बोर्ड लगाने से नहीं होगा शहर का विकास’
कारपोरेटर अशोक सिंह मन्हास ने कहा कि शहर में जगह स्मार्ट सिटी के बोर्ड लगाए जा रहे हैं, वर्टिकल गार्डेन बन रहे हैं जबकि बुनियादी सुविधाएं देने पर जोर नहीं दिया जा रहा है। शहर का विकास करने के लिए गलियों, नाले-नालियों को बेहतर बनाना होगा, लेकिन इस पर मेयर का जोर नहीं है। यही वजह है कि बारिश होने पर विभिन्न मोहल्लों में बाढ़ के हालात बन जाते हैं। ऐसे में कारपोरेटरों के लिए लोगों जवाब देना मुश्किल हो रहा है। नगर निगम में भाई-भतीजावाद हावी हो गया है। मेयर भाजपा के कारपोरेटरों को तरजीह दे रहे हैं, जबकि विपक्षी कारपोरेटरों को पूछा ही नहीं जा रहा है। जनरल हाउस में हम अपने मुद्दे रख सकते हैं, लेकिन मेयर इसकी बैठक ही नहीं बुला रहे हैं।

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