जम्मू-कश्मीर में दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए सशर्त स्कूलों को खोलने की सरकार ने मंजूरी प्रदान की है। इन शर्तों में अभिभावकों की सहमति के अलावा टीकाकरण या कोरोना टेस्ट करवाना होगा। इंजीनियरिंग, नीट और सिविल सेवाओं की कोचिंग वाले केंद्रों को भी खोलने की मंजूरी भी सशर्त दी गई है। मुख्य सचिव डॉ अरुण कुमार मेहता की अध्यक्षता वाली आपदा प्रबंधन विभाग की राज्य कार्यकारी कमेटी ने रविवार को इस बारे में नई निर्देशावली को जारी किया है। आदेश में कोरोना उपयुक्त व्यवहार के सुनिश्चित होने और जिला उपायुक्त की मंजूरी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खुलेंगे।
अभिभावकों की सहमति और आरटीपीसीआर या आरएटी टेस्ट करवाने के बाद 50 फीसदी बच्चों को कक्षा में पढ़ाई करने दी जाएगी। बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों की उपस्थिति भी 50 फीसदी ही होगी। शत प्रतिशत टीकाकरण करवा चुके 12वीं के विद्यार्थी अभिभावकों की मंजूरी से स्कूल आ सकेंगे। टीका लगवा चुके स्टाफ के सदस्य उन्हें पढ़ाई करवाएंगे। अगर किसी शिक्षक या विद्यार्थी में बुखार, सर्दी या खांसी जैसे लक्षण पाएं जाए तो उसे स्कूल गेट के अंदर प्रवेश नहीं मिलेगा। स्कूल प्रमुख को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोविड नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित होगा।
इंजीनियरिंग-मेडिकल की तैयारी करा रहे कोचिंग को छोड़ अन्य बंद रहेंगे

सिविल सेवाओं, इंजीनियरिंग और नीट कोचिंग केंद्रों को टीकाकरण लगवा चुके स्टाफ व विद्यार्थियों के लिए खोलने की मंजूरी दी गई है। केंद्रों के लिए भी शर्त यह रखी गई हैं कि तय निर्देशावली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो। अन्य सभी कोचिंग केंद्र बंद रहेंगे। उच्च शिक्षण संस्थानों में भी शत प्रतिशत टीकाकरण करवा चुके स्टाफ व विद्यार्थियों को ऑफलाइन पढ़ाई के लिए प्रवेश की मंजूरी दी गई हैं। जिलों के उपायुक्त की मंजूरी से संस्थानों को खोला जा सकेगा। संस्थानों को जिला प्रशासन से परामर्श कर विशेष टीकाकरण कैंप लगाने के लिए कहा गया हैं।

 

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