जम्मू। डोडा और किश्तवाड़ के क्षेत्रफल से जम्मू-कश्मीर के परिसीमन में फंसे पेच पर परिसीमन आयोग ने वीरवार को नई दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में प्रदेश के मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता को भी बुलाया गया है। इसके साथ ही जनगणना तथा नक्शा (मैप) विभाग से जुड़े अधिकारियों को भी तलब किया गया है ताकि गड़बड़ी को दूर किया जा सके।
दरअसल आयोग इन दिनों परिसीमन का ड्राफ्ट तैयार करने में जोरशोर से जुटा हुआ है। सभी जिलों के आंकड़े का विश्लेषण किया जा रहा है। इसमें क्षेत्रफल, आबादी, अनुसूचित जाति व जनजाति की संख्या, कनेक्टिविटी, मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों का विस्तार आदि के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। आंकड़ों के विश्लेषण के दौरान ही गड़बड़ी का पता चला कि साल 2011 की जनगणना रिपोर्ट में डोडा का क्षेत्रफल किश्तवाड़ से अधिक दिखाया गया है, जबकि किश्तवाड़ पूरे प्रदेश में सबसे अधिक क्षेत्रफल वाला जिला है। डोडा का क्षेत्रफल 8912 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या 409936 और किश्तवाड़ का क्षेत्रफल 1644 वर्ग किलोमीटर एवं जनसंख्या 230696 दर्ज है।
चूंकि परिसीमन का ड्राफ्ट तैयार करने में क्षेत्रफल एवं जनसंख्या ही मुख्य आधार हैं। ऐसे में आंकड़ों में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद आयोग को यह आशंका सताने लगी कि पूरी प्रक्रिया ही गलत न हो जाए। जो सात सीटें बढ़नी है यदि इन दो जिलों के खाते में आए तो पूरा परिदृश्य बदल सकता है। आयोग को यह भी चिंता है कि ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद आपत्तियों की भरमार सामने न आए। इन सब आशंकाओं के बीच गत आठ सितंबर को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर के चुनाव अधिकारियों को बुलाकर मंथन किया गया था।
आयोग ने जमीनी हकीकत की भी जानकारी ली

जनगणना के आंकड़ों में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए परिसीमन आयोग ने संबंधित जिलों से इसकी तस्दीक भी की। सूत्रों के अनुसार अब इन गड़बड़ियों को दूर करने के उपायों पर आयोग विचार कर रहा है ताकि जल्द से जल्द इसका हल निकालकर पारदर्शी तथा निष्पक्ष परिसीमन ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश किया जा सके।

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