मौसम के मिजाज धीरे-धीरे बदलने लगे हैं।हालांकि इस सप्ताह बारिश के आसार कम हैं लेकिन हल्के बादल सप्ताह भर छाए रहेंगे। बीच-बीच में कई स्थानों पर बारिश के भी आसार बनते दिख रहे हैं।वीरवार सुबह हल्के बादल छाए हुए थे और बारिश के आसार बनते दिख रहे थे।
सुबह का मौसम तो इतना अच्छा बना हुआ था कि ऐसा लग रहा था किसी पहाड़ी क्षेत्र में बैठे हों।आसामान पर बादल मंडरा रहे थे तो हवा में हल्की ठंडक दिल को छूने वाली थी। हर कोई इस मौसम का लुत्फ लेना चाहता था। खासकर शहर बन्य क्षेत्र मांडा की पहाड़ियों पर सैर करने वालों में मौसम को देखते हुए ही एक विशेष उत्साह देखने को मिला।
वहीं शहर के बाहरी क्षेत्रों में भी मौसम का अपना ही मजा था।धीरे-धीरे बादल निकल गए और बारिश का इंतजार बढ़ता ही गया। सूर्य देव कुछ देरी से दिखे लेकिन जब दिखे तो बादलों को बेअसर कर गए।इस समय अधिकतर क्षेत्रों में मौसम शुष्क है। धूप निकली हुई है। वहीं कश्मीर में बादल छाए रहने की संभावना है।जम्मू में भी दोपहर बादल हल्के बादल छाने की संभावना है।मौसम के बदले मिजाज के बीच तापमान में हल्की गिरावट आई है। इससे रात का मौसम सुहावना होने लगा है।
कुछ दिन पहले यहां रात को उमस नींद उड़ा रही थी और बिना, ऐसी, कूलर के सोना मुश्कल था लेकिन अब पंखे के साथ भी रात आराम से निकल जाती है। सुबह पहले पहर तो कुछ स्थानों पर पंखे भी बंद करने की जरूरत महसूस होने लगी है। बुधवार को शहर के कई क्षेत्रों में बारिश होने के बाद मौसम राहत भरा हो गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र, श्रीनगर से मिली जानकारी अनुसार इस सप्ताह अधिकतर समय बादल छाए रहने की संभावना है।इस मौसम से चुभन बाली गर्मी और उमस से राहत है।आने वाले दिनों में तापमान में हल्की गिरावट आने लगेगी। खासकर देर रात से सुबह पहले पहर तक ठंड अपना अहसास करवाने लगेगी। इस वर्ष मानसून की वारिश जम्मू संभाग के अधिकत जिलों में कम ही हुई है। इस मानसून में सबसे ज्यादा बारिश जिला रियासी में 1175.8 एमएम दर्ज की गई। जम्मू में जून से सितंबर तक 613.1 एमएम बारिश दर्ज की गई है।जिला कठुआ में 861.0 एमएम बारिश दर्ज की गई है।जिला ऊधमपुर में 1077 एमएम बारिश दर्ज की गई है। जिला सांबा में 773.1 एमएम बारिश दर्ज की गई है। अगस्त में जम्मू संभाग के सभी जिलों में सामान्य से करीब 70 एमएम कम बारिश हुई है।कम बारिश होने से सब्जियों की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। वहीं बारिश पर निर्भर किसानों की खेती कुछ हद तक प्रभावित हुई है लेकिन बारिश की अच्छी डिस्ट्रिब्यूशन के चलते चिंता की बात नहीं है।वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में मक्की की कटाई का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है। अगर बच्चा कहीं कमजोर है तो उसकी कमजोरी दूर करने के प्रयास अभिभावकों के साथ मिलकर शिक्षक करेंगे।

कहां रहा कितना तापमान

जम्मू 32.7 22.8
बनिहाल 29.4 16.0
बटोत 25.8 16.2
कटड़ा 31.0 20.6
भद्रवाह 28.0 15.2
श्रीनगर 27.8 15.7
काजीगुंड 27.0 14.2
पहलगाम 23.2 10.3
कुपवाड़ा 29.7 13.0
कोकरनाग 26.4 12.6
गुलमर्ग 17.4 7.0
लेह 22.7 8.0
कारगिल 25.6 15.0

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