जम्मू कश्मीर में 23 अक्टूबर को मौसम करवट बदल लेगा। भारी बर्फबारी व बारिश से ठंड पूरी तरह दस्तक देगी। वहीं कश्मीर का देश-दुनिया से जमीनी व हवाई संपर्क प्रभावित रहेगा। खेतों और बाग बगीचों में फसल को भी नुकसान पहुंचेगा।
मौसम विभाग के उपाध्यक्ष डा. मुख्तार अहमद ने कहा कि मौसम में यह परिर्वतन पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण आएगा। विक्षोभ का प्रभाव 22 अक्टूबर शाम से शुरू हो जाएगा। कश्मीर के उच्च पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी व निचले इलाकों में बारिश होगी। 23 अक्टूबर तक विक्षोभ का प्रभाव ज्यादा रहेगा। गुलमर्ग, बांडीपोरा, कुपवाड़ा, बारामळ्ला, गांदरबल, बड़गाम के अलावा जम्मू संभाग के पुंछ, राजौरी, डोडा, किश्तवाड़ व अन्य जिलों के पहाड़ों में सामान्य से भारी बर्फबारी व बारिश होगी। वादी का देश व दुनिया के साथ जमीनी व हवाई संपर्क भी प्रभावित हो सकता है। फसलों को भी क्षति पहुंचा सकती है। 24 अक्टूबर शाम से मौसम में सुधार आना शुरू हो जाएगा। मौजूदा सर्दियों में अभी तक पर्यटनस्थल गुलमर्ग समेत कश्मीर के उच्च पर्वतीय इलाके दो बार बर्फ की चादर ओड़ चुके हैं।
गुलमर्ग न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री : कश्मीर में बुधवार को मौसम शुष्क बना रहा। श्रीनगर व सटे इलाकों में दिनभर धूप छाई रही। अधिकतम तापमान में तो थोड़ी सी बढ़ोतरी हुई, लेकिन न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट जारी है। विश्व प्रसिद्ध गुलमर्ग न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस के साथ पूरे कश्मीर में ठंडा क्षेत्र रहा। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 6.3 और पहलगाम में 2.7 डिग्री सेल्सियस रहा।
पेड़ों से फल जल्दी उतारें : कश्मीर में भारी बर्फबारी व बारिश की संभावना को देख कृषि विशेषज्ञों ने किसानों व फल उत्पादकों को फसल काटने व पेड़ों से फल जल्दी उतारने तथा शाखें काटने की सलाह दी है। शेर ए कश्मीर कृषि आयुर्विज्ञान अनुसंधान में पैथोलाजी विभाग में प्रोफेसर फयाज अहमद राथर ने बताया, अभी अधिकांश इलाकों में किसानों ने मक्की की फसल नहीं काटी है। सेब भी अभी पेड़ों पर ही हैं। बर्फबारी व बारिश फसलों व सेब के फलों को नुकसान पहुंचा सकती है।

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