लम्बे समय से मचेल यात्रा को लेकर इंतजार कर रहे भगतों के लिए अहम खबर है! आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तीन माह बंद रहने के बाद वैशाखी के दिन यानी 14 अप्रैल को मचैल माता चंडी के दरबार के कपाट खुलेंगे। इसके साथ ही गांव वालों ने मंदिर परिसर की साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया है। मकर संक्रांति के दिन मचैल माता के दरबार से माता महाकाली की मूर्ति को बड़े मंदिर से उठाकर वहां से 100 मीटर की दूरी पर स्थानीय निवासी पहलवान सिंह की छत पर बने काठ (लकड़ी) के छोटे मंदिर में रख दिए जाने की परंपरा है। इस परंपरा को मंदिर का मुख्य पुजारी व पूरे गांव के लोग इकट्ठे होकर बड़े उत्साह और धूमधाम से निभाते हैं। इसके साथ ही माता चंडी का दरबार तीन महीने के लिए बंद कर दिया जाता है।
इसके साथ ही तीन माह तक बड़े मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं की जाती, मगर जहां पर माता महाकाली की मूर्ति को रखा जाता है, वहां पूजा चलती रहती है। वैशाखी के दिन गांव के लोग माता चंडी के मंदिर की साफ-सफाई कर छोटे मंदिर से मूर्ति को उठाकर ढोल नगाड़ों के साथ जयकारा लगाते हुए उसे दोबारा बड़े मंदिर में स्थापित कर देते हैं और फिर मुख्य पुजारी पूजा करता है। उसके बाद लगातार मंदिर खुला रहता है। यह परंपरा काफी पुरानी है।
अब जैसे-जैसे वैशाखी का दिन नजदीक आ रहा है तो गांव वाले भी उस दिन के इंतजार में बैठे हैं। तैयारियों में जुटे हुए हैं। लेकिन लगता है इस बार वैशाखी के दिन यात्रियों की कमी रहेगी। जो यात्री घर से तैयारी कर माता चंडी के दरबार में जाने की इच्छुक होंगे, उन्हें कठिनाई से गुजरना पड़ेगा। क्योंकि कुंडेल से लेकर चशोती तक रास्ते की हालत बहुत खस्ता है। यहां तक कि पैदल चलना भी मुश्किल है। हालांकि डीसी अशोक शर्मा ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि कुंडेल से लेकर चशोती तक रास्ते को ठीक करने का काम शुरू कर दिया गया है।

 

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