आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश सरकार के एक आदेश में अस्पष्टता के चलते स्वास्थ्य विभाग को लाखों का नुकसान हुआ है। इसके साथ ही आदेश में स्पष्टता न होने के चक्कर में प्रति माह ढाई दिन का अतिरिक्त वेतन के लिए विभाग के कर्मचारियों की झोली भरती रही। उन कर्मचारियों को भी यह अतिरिक्त लाभ दिया जाता रहा, जो किसी भी सूरत में इसके हकदार नहीं थे और जो हकदार थे वह अपनी बात रखते-रखते थक गए पर मिला कुछ नहीं। अब जम्मू के स्वास्थ्य निदेशक ने वीरवार को स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखा है कि वह यह स्पष्ट करे दें कि कौन से वर्गों के कर्मचारी ढाई दिन के वेतन लेने के योग्य हैं। जानकारी के अनुसार ताकि भविष्य में कोई विवाद की स्थिति पैदा न हो।
साथ ही स्वास्थ्य विभाग में ढाई दिन के अतिरिक्त वेतन को लेकर अक्सर विवाद उठता रहा है। इन अतिरिक्त वेतन को लेने के लिए विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों में हमेशा खींचतान रही है। दरअसल, दिसंबर 2020 में जम्मू कश्मीर के आडिट और इंस्पेक्शन विभाग के महानिदेशक तथा स्वास्थ्य विभाग के वित्तीय निदेशक ने स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू के अधीनस्थ कार्यालयों का आडिट करने को कहा था। इसके बाद कुछ जिला अस्पतालों, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सा अधीक्षकों के कार्यालयों का साल 2012-22 में आडिट करवाया गया। इसमें पता चला कि सरकार के आदेशों के बावजूद ढाई दिन का वेतन देने में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। यह लाभ उन कर्मचारियों को भी दिया जा रहा है जो कि इसके योग्य नहीं हैं। आडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि उन कर्मचारियों को भी रोस्टर ड्यूटी में शामिल किया गया जो इसके हकदार नहीं थे। टीम ने अयोग्य कर्मचारियों को जारी ढाई दिन के अतिरिक्त वेतन को वापस लेने के भी कहा था।
आडिट रिपोर्ट में इन वर्गों आपत्ति जताई, फिर भी कुछ नहीं हुआ : आडिट रिपोर्ट में कई वर्गों पर आपत्ति जताई है, जिसके कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन का भुगतान कर दिया गया। इन वर्गों में डेंटल टेक्नीशियन, आप्थालमिक टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन, कम्यूनिटी हेल्थ आफिसर, सेनेटरी इंस्पेक्टर, हेल्थ एजूकेटर, बेसिक हेल्थ वर्कर, सफाई कर्मचारी, चौकीदार, एक्सटेशन एजूकेटर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, रेफ्रिजरेटर मैकेनिक, इलेक्ट्रीशियन, जूनियर हेल्थ इंस्पेक्टर, नर्सिंग अर्दली, फार्मासिस्ट, धोबी, मलेरिया इंस्पेक्टर शामिल हैं। इसके बावजूद इन्हें अतिरिक्त वेतन दिया जाता रहा।

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