: आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू व कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कथित आतंकी आमिर मागरे के स्वजन को पांच लाख मुआवजा देने के एकल पीठ के फैसले को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा। अदालत ने प्रदेश प्रशासन को निर्देश दिया कि वह आमिर की कब्र पर उसके स्वजन को फातेहा व अन्य मजहबी रस्मों को भी पूरा करने दे।
इसके साथ ही जम्मू संभाग के गूल, रामबन का रहने वाला आमिर मागरे बीते साल नवंबर में श्रीनगर के हैदरपोरा क्षेत्र में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में एक पाकिस्तानी आतंकी संग मारा गया था। मुठभेड़ में आतंकी ठिकाना बने शापिंग कांप्लेक्स का मालिक अल्ताफ बट के अलावा उसका किरायेदार डा. मुदस्सर गुल भी मारा गया था।
डा. गुल के पास आमिर काम करता था। पाक आतंकी भी उसके पास रहता था। पुलिस के मुताबिक, आमिर सक्रिय आतंकी और पाकिस्तानी आतंकी का साथी था। डा. गुल ओवरग्राउंड वर्कर और हैंडलर था। यह मुठभेड़ 15 नवंबर 2022 को हुई थी।
बताया यह जा रहा है कि आमिर मागरे के पिता लतीफ मागरे ने बेटे का शव लेने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय में एकल पीठ ने याचिका पर 27 मई को फैसला सुनाते हुए प्रदेश प्रशासन को कहा था कि वह उसका शव कब्र से निकलवा स्वजन को सौंपे। अगर शव सौंपने लायक नहीं है तो उसके स्वजन को पांच लाख मुआवजा दिया जाए। प्रदेश प्रशासन ने एकल पीठ के फैसले के विरुद्ध सर्वाेच्च न्यायलय में चुनौती दी थी। सर्वाेच्च न्यायालय ने शव को कब्र से निकालने के एकल पीठ के फैसले पर स्थगनादेश जारी करते हुए प्रदेश प्रशासन को डिवीजन बेंच में अपील के लिए कहा था। प्रदेश प्रशासन ने बेंच में अपील की थी।
जम्मू कश्मीर उच्च न्यायाल के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्तल और जस्टिस जावेद वानी ने इस प्रदेश प्रशासन की अपील को निपटाते हुए एकल पीठ के मुआवजा संबंधी आदेश को सही ठहराया है। डिवीजन बैंच ने अपने 11 पेज के फैसले में कहा है कि अपील दायर करने वाले की तरफ से प्रतिवादी नंबर एक को प्रदान किए जाने वाला मुआवजा भविष्य के लिए परंपरा नहीं बनना चाहिए। अदालत ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह आमिर मागरे के पिात व नौ अन्य रिश्तेदारो को उत्तरी कश्मीर के वडर पायीन हंदवाड़ा स्थित उसकी कब्र पर फातेहा व अन्य मजहबी रस्मों को अदा करने दे। डिवीजन बेंच ने प्रदेश प्रशासन के वकील के इस तर्क को सही माना कि आमिर का शव कब्र से निकालना सही नहीं है,क्योंकि दफनाए जाने के बाद शव नष्ट होने लगता है। आमिर के पिता ने सर्वाेच्च न्यायालय के समक्ष कहा था कि वह भी अब शव को कब्र से निकालने के हक में नहीं है।

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