आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू की बेटी फ्लाइंग ऑफिसर प्रियंका चौधरी आपनी बड़ी उपलाब्धि के बाद अपने स्कूल पहुंचीं जहां पर उन्होंने छात्रों को संबोधित कर विचार विमर्श किए और अपना अनुभव साँझा किया! इस दौरान भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग आफिसर चुनी गई प्रियंका चौधरी को सम्मानित किया। आपको बता दें कि प्रियंका सांबा के कंगवाला गांव की रहने वाली हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से मुश्किल से दो किलोमीटर दूर है।चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि सीमा पर संघर्ष के बिना जीवन नहीं है। परिवारों को हर दिन नुकसान उठाना पड़ता है। हमारे युवाओं पर इस स्थिति का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। उनकी शिक्षा प्रक्रिया में बाधा आती है, जिससे वे नौकरियों के लिए अयोग्य हो जाते हैं। जब हम सीमा की गड़बड़ी के नतीजों का सामना कर रहे हैं, प्रियंका जैसी लड़कियां आगे आती हैं और हमें दिखाती हैं कि कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ हमारे बच्चे वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं जिस पर वे अपना मन लगाते हैं। चौधरी ने ऐसी बेटी की परवरिश करने और सभी को यह साबित करने के लिए माता-पिता की सराहना की। चौधरी ने कहा कि हाल के वर्षों में उन्होंने ऐसे कई परिवारों के उदाहरण देखे हैं, जहां माता-पिता अपनी बेटियों को सपने देखने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। चौधरी ने कहा कि प्रियंका अपने माता-पिता श्री उज्जगर सिंह और उनकी पत्नी की वजह से इस मुकाम तक पहुंची हैं। उसने अपने पिता और दादा की तरह सेना की सेवा में शामिल होने का सपना देखा और उसके परिवार ने उसके सपने को पोषित किया और उसकी मदद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अगर एक लड़की अपने जीवन की कठिनाइयों से ऊपर उठकर ऐसा कर सकती है, तो दूसरे भी करकते हैं।
उन्होंने कहा कि दूर—दराज के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोग काफी मेहनती हैं, वे हर साल अपनी आजीविका खो देते हैं और हर साल इसे फिर से बनाते हैं। सीमा पर गोलीबारी हमारे घर, मवेशी, जमीन छीन सकती है लेकिन वे हमारे संकल्प, हमारी ताकत, जीवन में सफल होने की भावना को नहीं छीन सकती। वहीं, उनका कहना था कि अगर यह सब मैं कर सकती हूं तो सब यह कर सकती! कोई चीज तक तक कठिन नहीं होती जब तक आप ठान न ले! ज्ज्बा हो तो सब को हासिल किया जा सकताी है! जिस इंसान को जितना संघर्ष करन पड़ता है मंजिल भी उसके उतनी ही बेहतर मिलती है! वहीं, स्कूल प्रबंधन की तरफ से अन्य छ़ात्रों को प्रियंका चौधरी के जीवन से सीख लेने को कहा गया और कई अन्य छात्रों को भी बधाई दी गई जिन्होंने स्कूल का नाम रोश किया है!

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