आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश सरकार ने सभी जिला विकासायुक्तों और विभागों को नौ मदों के अलावा अन्य सभी विकास कार्याें के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के राजस्व बजट के 50 प्रतिशत धनराशि के उपयाेग को मंजूरी दी है। इसके साथ ही यह निर्देश दिया गया है कि धनराशि का प्रयोग सिर्फ विकास कार्याें पर किया जाए और उनका असर जमीन सतह पर नजर भी आए। किसी भी परिस्थिति में अनावश्यक खर्च से पूरी तरह बचने को कहा गया है।
संबंधित अधिकारियों ने बताया कि जिन नौ मदों पर फिलहाल खर्च से मना किया गया है उनमें अवकाश यात्रा रियायत, फर्नीचर व साज सज्जा, ब्याज, ऊर्जा खरीद, खाद्यान्न लागत मूल्य, बर्फ हटाना, वाहनों की खरीद और आपदा राहत कोष शामिल है। इसके अलावा अन्य कार्योें के लिए निधियोें के खर्च की अनुमति सशर्त है। जम्मू कश्मीर विनियोग अधिनियम 2022 के तहत सभी नियंत्रक अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि बजटीय आवंटन अनुदान की मांगों के अनुरूप हो और बीम्स के जरिये ही निधि जारी हो। सभी नियंत्रक अधिकारी को निधियों के उपयोग की मंजूरी के बाद एक सप्ताह के भीतर ही अपने अधीनस्थ विभागों को निधियां जारी करनी होंगी।
इसके साथ ही प्रशासकीय विभाग में बीम्स प्रशासक को अनुपालन संबंधी रिपोर्ट हर माह वित्त विभाग को सौंपनी होगी। बता दें कि किसी भी वस्तु की खरीद जीईएम पोर्टल से संबंधित नियमों के तहत होगी। अगर किसी कार्य के लिए ई-टेंडर जरूरी है तो यह प्रक्रिया अप्रैल 2022 में ही शुरू की जाए और इसे 31 मई, 2022 तक पूरा कर लिया जाए। वित्त विभाग की मंजूरी के बिना किसी भी कार्य के लिए निर्धारित या आवंटित निधि का इस्तेमाल किसी दूसरी जगह नहीं किया जाएगा।
बजट के लिए जिला विकास आयुक्तों को पीआरआइएस, बीडीसीएस और डीडीसीएस की सलाह के साथ संबंधित जिलों का जिला योजना तैयार करना होगा। जिला सेक्टर प्रोजेक्ट की कार्य योजना के लिए सीपीओ (एस)/एओ(एस) की जिम्मेदारी होगी। विभागों और डीडीसीएस का मुख्य ध्यान केंद्रित जनता से जुड़े लाभों पर होना चाहिए। सभी तरह के कार्यों का भौतिक निरीक्षण के साथ तीसरी पार्टी से निरीक्षण करवाया जा सकता है। कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया जरूरी होगी। लाभकारी योजनाओं में लाभार्थियों को राशि का भुगतान डीबीटी मोड से किया जाएगा। निष्पादन एजेंसियों को निर्धारित कोविड प्रोटोकाल का पालन करना होगा।

LEAVE A REPLY