आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि चुनाव जम्मू-कश्मीर की समस्या का हल नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाए जाने संबंधी याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीन वर्ष तक सुनवाई न करना,अफसोसनाक है, लेकिन फिर भी मुझे उम्मीद है कि अदालत में हमें इंसाफ मिलेगा और जम्मू-कश्मीर को उसका विशेष दर्जा लौटाया जाएगा।
गत सोमवार को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में पत्रकारों से बातचीत में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह मामला बहुत अहम और संवेदनशील है। जम्मू-कश्मीर के लोगों का मान-सम्मान और जिंदगी का सवाल है। उन्होंने कहा कि हमने बीते कुछ वर्षाें में देखा है कि पूरे देश में मुस्लिमों के खिलाफ एक तरह का माहौल तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं क्योंकि जहांगीरपुरी का मामला सामने है। जहांगीरपुरी दिल्ली में अदालत के फैसले की अवमानना हुई है, लेकिन सर्वाेच्च न्यायालय ने कोई कार्रवाई नहीं की। सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद वहां लोगो के मकान गिराने का क्रम जारी रहा है। मेरे ख्याल से यह अदालत की अवमानना है, लेकिन हमने सर्वाेच्च न्यायालय को इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई करते नहीं देखा है। सर्वाेच्च न्यायालय को अदालत की अवमानना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसलिए हमें भी कई तरह की शंकाएं हैं।
साथ ही बताया यह भी जा रहा है कि पांच अगस्त 2019 को लागू जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने संसद में पूर्ण बहुमत का इस्तेमाल करते हुए हमसे हमारा विशेष दर्जा असंवैधानिक तरीके से छीन लिया। मैं उम्मीद करती हूं कि सर्वाेच्च न्यायालय इसे बहाल करेगा। परिसीमन संबंधी सवाल के जवाब में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह तो पांच अगस्त 2019 को मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर राज्य का राजनीतिक, सामाजिक, जनसांख्यिकी चरित्र बदलने के शुरु किए गए मिशन का ही एक हिस्सा है। केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों को बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक बनाना चाहती है। उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करना चाहती है। जम्मू-कश्मीर के लोगों को राजनीतिक रूप से कमजोर बनाने के लिए भाजपा हर संभव प्रयास कर रही है। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बारे में पूछे जाने पर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि चुनाव से जम्मू-कश्मीर की समस्या हल नहीं होगा। हमें नहीं मालूम कि यहां चुनाव कब कराए जाएंगे। मेरे ख्याल से यहां जो तबाही का खेल जारी है, चुनाव उसका हल नहीं है। यहां जो समस्या है, उसके हल के लिए लिए केंद्र सरकार को जो काम करना चाहिए, वह नहीं कर रही है।

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