आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश में पंजीकृत वाहनों में सिर्फ दो लाख वाहन ही बिना हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट एचएसआरपी के बिना रह गए हैं। यह जानकारी मुख्य सचिव डा अरुण कुमार मेहता की अध्यक्षता में हुई प्रदेश में ट्रैफिक प्रबंधन की समीक्षा बैठक में दी।
साथ ही मुख्य सचिव ने बैठक में मौजूदा नागरिक और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को अगले 15 दिन के भीतर प्रदेश में ट्रैफिक के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक प्रभावी और व्यावहारिक कार्यायोजना तैयार करने को कहा है।उन्होंने कहा कि वह इस दिशा में आने वाली सभी रुकावटा को वैज्ञानिक अध्ययन कर उनका स्थायी समाधान करें।
नागरिक सचिवालय में हुई इस बैठक में डा मेहता ने कहा कि सड़क पर किसी भी जगह अनाधिकृत वाहन पार्किंग नहीं होनी चाहिए। सभी व्यस्त इलाकों में वाहनों की पार्किंग के लिए जगह को चिन्हित किया जाए। अक्सर देखा गया है कि सभी प्रमुख बाजारों और पर्यटनस्थलों पर जहां लोगों की भीड़ ज्यादा रहती है,अक्सर सड़कों पर जाम रहता है। इससे निपटने के लिए यातायात नियमों को सही तरीके से लागू किया जाना जरुरी है।
उन्होंने सभी सड़कों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद वहां बैरियर और डायवर्शन सुनिश्चित बनाने का निर्देश देते हुए कहा कि सभ्य समाज के पास उनकी समस्याओं को व्यावहारिक और सरल हल होता है, इसलिए हमारा ट्रैफिक प्रबंधन हमारे सभ्य व जागरुक होने को प्रतिविम्ब होना चाहिए।
ट्रैफिक की समस्या हल करने और इसके बेहतर प्रबंधन के लिए अल्प और दीर्घकालिक समाधानों पर जाेर देते हुए उनहोंने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेटस एचएसआरपी को सख्ती से कार्यानवित करने का निर्देश देते हुए कहा किय वाहनों की प्रभावी निगरानी के लिए जरुरी है।
बैठक में मौजूदा अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग आरके गोयल ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए हर स्तर पर कानून को सख्ती से लागू करने की जरुरत है। उन्होंने सड़कों पर वाहनों के आवागमन को सुचारु बनाने के लिए अत्याधुनिक उपकरणेां और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने उपलब्ध पार्किंग स्थलों के यथासंभव सदुपयोग को सुनिश्चित बनाने पर जोर देते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में वाहनारें पर एचएसआरपी को लगाए जाने की प्रक्रिया को निर्धारित समयावधि में पूरा करने लिए संबधित एजेंसी को अपने काम मे और तेजी लाने की जरुरत है।
पीडब्लयूडी विभाग के प्रधान सचिव ने ट्रैफिक प्रबंशन को बेहतर बनाने के लिए सड़कों पर बैरियर को न्यूनतम बनाने और संबधित कानूनों के कार्यान्वयन को सरल बनाने पर जोर दिया। परिवहन विभाग के सचिवायुक्त ने बताया कि प्रदेश में 18.5 लाख वाहनों में से 16.5 लाख वाहनों पर एचएसआरपी लगाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि एचएसआरपी लगाने के लिए अधिकृत कंपनियां हमारी आवश्यक्तानुरुप काम करने में पूरी तरह समर्थ हैं और इस संदर्भ में लक्ष्य को संबधित कानून को सख्ती से लागू कर आसानी से पूरा किया जा सकता है।
बैठक में मौजूदा आइजी ट्रैफिक ने ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे उपायों का उल्लेख करते हुए बताया कि ई-चालान, आटोमैटिक ट्रैफिक सिग्नल, इंटरसेप्टर समेत अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाइवे पेट्रोलिंग वाहन, इंटरसेप्टर, मोटर बाइक, बाडी कैमरा व अन्य साजो सामान खरीदा जा रहा है। यह सभी प्रदेश में ट्रैफिक को पूरी तरह सुचारु बनाने और लोगों की यात्रा को सुविधा जनक बनाने में कारगर साबित होंगे।

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