आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ अमरनाथ त्रासदी ने कई परिवारों से उनके अपनों को छील लिया! इस बीच खबर यह भी आ रही है कि श्री अमरनाथ यात्रा के लिए राजस्थान से आए सुशील अभी 9 दिन पहले ही सेवानिवृत्त हुए ​थे! उन्होंने लोगों को बादल फटने से आई बाढ़ में डूबने से बचाया, बल्कि लोगों को बचाते—बचाते खुद बलिदान हो गए!श्री गंगानगर ट्रैफिक थाने के पूर्व प्रभारी थे। त्रासदी से ठीक नौ दिन पहले वह सेवा से सेवानिवृत्त हुए। खत्री उन 17 श्रद्धालुओं के जत्थे में शामिल थे जो 3 जुलाई को श्रीगंगानगर से अमरनाथ यात्रा के लिए निकले थे।
सेवानिवृत्ति के बाद 61 वर्षीय खत्री ने अपनी पत्नी और बेटे के साथ छुट्टियां मनाने की योजना बनाई थी। वह अपने रिश्तेदार सुनीता और उनके पति मोहनलाल सहित श्री गंगानगर के कई अन्य लोगों के साथ अमरनाथ गुफा के पास एक तंबू में रह रहे थे।
खत्री की मृत्यु की पुष्टि करते हुए, अमरनाथ लंगर सेवा समिति के अध्यक्ष, श्री गंगानगर, नवनीत शर्मा ने कहा कि वह खत्री से नहीं मिल सके, लेकिन श्री गंगानगर के एक कपड़ा व्यापारी मोहनलाल वाधवा और उनकी पत्नी सुनीता वाधव से मिले थे, जो 17 यात्रियों के दल का हिस्सा थे! ​लेकिन जिस प्रकार उन्होंने अपने साहस और बलीदान से लोगों को जान बचाई वह हमेशा हमारे दिलों में जिन्दा रहेगे!

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