आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू-श्रीनगर हाईवे बारिश के बायेद हुए भूस्खलन के बाद कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया गया था। बारिश थमने के बाद हाईवे पर गिरे मलवे को हटा लिया गया है और अब जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर वाहनों की आवाजाही फिर से सुचारू रूप से जारी है। डीएसपी हैडक्वाटर रामबन प्रदीप कुमार सेन जोकि चंद्रकोट यात्रा अधिकारी भी हैं, ने बताया कि भूस्खलन के बाद रामबन यात्री निवास पर रोके गए अमरनाथ श्रद्धालुओं को भी हाईवे खुलते ही श्रीनगर की ओर रवाना कर दिया गया है। कश्मीर रवाना किए गए अमरनाथ श्रद्धालुओं की संख्या 4500 के करीब थी।
ट्रैफिक विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रामबन जिले में भारी बारिश के हाईवे पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। इस बीच कीला मोड़, कैफेटेरिया मोड़, सेरी, मरूग, टनल नंबर 2, बैटरी चश्मा और पंथियाल सहित कई जगहों पर भूस्खलन हुआ और पहाड़ों से पत्थर भी गिरना शुरू हो गए। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाईवे पूरी तरह सुरक्षित होने तक वाहनों को सड़कों पर उतरने से मना कर दिया गया। ट्रैफिक विभाग के इस आदेश के बाद जम्मू से श्रीनगर जाने वाले वाहनों को नगरोटा, जखैनी आदि में रोक दिया गया।
इस बीच जम्मू भगवी नगर से बाबा अमरनाथ के दर्शनों के लिए रवाना हुए श्रद्धालुओं के जत्थे को रामबन चंद्रकोट स्थित यात्री निवास में रोक लिया गया। यहां श्रद्धालुओं के विश्राम व खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई थी। नौ बजे के करीब बारिश थमने के बाद एनएचएआइ के कर्मी मशीनों के साथ हाईवे पर पड़े मलवे को हटाने में जुट गए। हाईवे पर मलवा हटते ही वाहनों की आवाजाही को फिर से सुचारू कर दिया गया। जैसे ही हाईवे पर वाहनों का जाम कम हुआ, उसके बाद अमरनाथ यात्रियों को भी अगले पड़ाव पर रवाना कर दिया गया।इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों पर हर घर तिरंगा की भावना को प्रचारित और प्रोत्साहित करने के लिए भी कहा।
डीसी रामबन ने एक ट्वीट पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि, “जैसा कि एनएचएआई ने बताया है, रामबन जिले में एनएच-44 पर यातायात बहाल कर दिया गया है।” वहीं डीएसपी मुख्यालय रामबन प्रदीप कुमार सेन ने बताया कि कीला मोड़ में कैफेटेरिया मोड़, सेरी, मरूग, टनल नंबर 2, बैटरी चश्मा और पेंटियाल सहित कई जगहों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने के कारण कुछ घंटों के लिए राजमार्ग अवरुद्ध हो गया था।
डीएसपी सेन जो चंद्रकूट में कैंप अधिकारी भी हैं, ने बताया कि हाईवे खुलते ही यहां फंसे हुए अमरनाथ यात्रियों को भी कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दे दी गई। आज के जत्थे में लगभग 4500 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिन्होंने पहलगाम और बालटाल के रास्ते पवित्र गुफा की ओर जाने के लिए अपना पंजीकरण करवाया है।

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