आपकी जाानकारी के लिए बता दें कि खबर यह है कि अब वो दिन दूर नहीं, जब लोगों को प्रापर्टी टैक्स के रूप में थोड़ी.बहुत जेब ढीली करनी ही पड़ेगी क्योंकि जम्मू नगर निगम को ऐसा नहीं करने की सूरत में सरकार से फंड मिलना बंद हो जाएंगे। सिर्फ कर्मचारियों के वेतन के लिए फंड मिलेंगे। लिहाजा निगम अपने राजस्व स्रोतों को बढ़ाने के लिए मजबूर है। इसमें प्रापर्टी टैक्स पहले नंबर पर है। अगर निगम ने राजस्व जुटाने के स्रोत नहीं तलाशे तो इसे दिवालिया होने से कोई रोक नहीं सकेगा।
इसके संबंधित बता दें कि निगम के आयुक्त राहुल यादव ने बताया कि निगम अपना बजट तो तैयार कर रहा है लेकिन इसमें सरकार की गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सरकार ने निगम को सिर्फ वेतन के लिए फंड देने के लिए कहा है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी दिशानिर्देशों के तहत प्रापर्टी टैक्स लगाना ही पड़ेगा क्योंकि प्रापर्टी टैक्स नहीं लगाने की सूरत में सरकार से मिलने वाले फंड बंद कर दिए जाएंगे। अब कम या ज्यादा पर चर्चा करते हुए हमें इस दिशा में कदम बढ़ाने ही होंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी गाड़ियां तो खरीद कर दे सकती है लेकिन तेल निगम को ही जुटाना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार से निगम को विकास के लिए फंड की उम्मीद बंद कर देनी चाहिए। लिहाजा अब आत्मनिर्भर बनना होगा। अपने स्रोत तलाशने ही होंगे।
प्रजा फाउंडेशन के सदस्यों ने कहा कि बिजलीए पानी के अलावा पीने की पानी, शराब की बिकने वाली बोतलों पर एक.दो प्रतिशत टैक्स लगाया जा सकता है। इसे कंपनी को देना ही होगा। बजट कैसे बनाया जाए और पैसों का खर्च कैसे किया जाना चाहिए, बारे भी प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार की पंजीकरण फीस नगर निगम विभिन्न विभागों से ले सकता है।

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